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सही मातà¥à¤°à¤¾ में पिलाà¤à¤‚ छोटे बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को दूध, जरूरत से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ दूध पिलाने से हो सकते हैं ये नà¥à¤•सान
Side effects of drinking too much milk: छोटे बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ का शरीर तेजी से बढ़ता है, इसलिठउसे परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ पोषण देना जरूरी होता है। इसलिठबचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ दूध देना जरूरी होता है। लेकिन जरूरत से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ दूध à¤à¥€ बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की सेहत को नà¥à¤•सान पहà¥à¤‚चा सकता है। इस लेख में जानें उमà¥à¤° के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° बचà¥à¤šà¥‡ को कितनी मातà¥à¤°à¤¾ में दूध पिलाना चाहिà¤à¥¤
दूध को संपूरà¥à¤£ आहार कहा जाता है, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि इसमें लगà¤à¤— वे सà¤à¥€ पोषक ततà¥à¤µ पाठजाते हैं जो शारीरिक विकास के लिठबेहद जरूरी होते हैं। यही कारण है कि छोटे बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के लिठमिलà¥à¤• बेहद जरूरी होता है। छोटे बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ का शरीर विकसित हो रहा होता है, जिसके लिठउनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ मातà¥à¤°à¤¾ में पोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ की आवशà¥à¤¯à¤•ता पड़ती है। जिन बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ पोषण नहीं मिल पाता है, तो उनकी नॉरà¥à¤®à¤² गà¥à¤°à¥‹à¤¥ रà¥à¤• जाती है और कà¥à¤› गंà¤à¥€à¤° सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में बचà¥à¤šà¥‡ कà¥à¤ªà¥‹à¤·à¤£ का शिकार à¤à¥€ हो जाते हैं। इसलिठडॉकà¥à¤Ÿà¤° बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ मातà¥à¤°à¤¾ में दूध पिलाने का सà¥à¤à¤¾à¤µ देते हैं। लेकिन कà¥à¤¯à¤¾ आपको पता है कि बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को à¤à¤• लिमिट से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ दूध पिलाना उनके सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ को नà¥à¤•सान पहà¥à¤‚चा सकता है। हालांकि, वैसे तो लिमिट से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ खाया गया कोई à¤à¥€ फूड हेलà¥à¤¥ को नà¥à¤•सान पहà¥à¤‚चा सकता है। लेकिन जरूरत से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ दूध का सेवन करने से बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को कई गंà¤à¥€à¤° सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ समसà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚ हो सकती हैं। अगर आपके घर में à¤à¥€ बचà¥à¤šà¥‡ हैं, तो आपके लिठयह जानना बेहद जरूरी है कि उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ रोजाना कितनी मातà¥à¤°à¤¾ में दूध मिलना चाहिà¤à¥¤
बचà¥à¤šà¥‡ को कितना दूध पीना चाहिà¤
छोटे बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के लिठकितना दूध उचित है यह उनकी उमà¥à¤° पर निरà¥à¤à¤° करता है।
उमà¥à¤° के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° उसके लिठदूध की उचित मातà¥à¤°à¤¾ निमà¥à¤¨ दी गई है -
नवजात शिशà¥à¤“ं के लिठहर 2 से 3 घंटे में 45 से 90 मिलीलीटर दूध
लगà¤à¤— 2 महीने के बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को हर 4 से 5 घंटे में 120 से 150 मिलीलीटर दूध दें
बचà¥à¤šà¤¾ यदि 4 महीने या उससे जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ का हो गया है, तो उसे 120 से 150 मिलीलीटर दूध दें जितनी बार à¤à¥€ उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ à¤à¥‚ख लगे
अगर बचà¥à¤šà¤¾ 6 महीने से ऊपर का हो गया है तो उसे दिन में 4 से 5 बार 180 से 230 मिलीलीटर दूध दे
सकते हैं।
वहीं अगर बचà¥à¤šà¤¾ à¤à¤• से दो साल का है या फिर उससे à¤à¥€ बड़ा हो गया है, तो उसकी à¤à¥‚ख, शारीरिक वजन और सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° दूध की मातà¥à¤°à¤¾ को कम जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ किया जा सकता है। अगर आप निशà¥à¤šà¤¿à¤¤ नहीं कर पा रहे हैं कि बचà¥à¤šà¥‡ के कितना दूध देना चाहिà¤, तो à¤à¤¸à¥‡ में आप किसी अचà¥à¤›à¥‡ डाईटीशियन से बात कर सकते हैं।
जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ दूध नà¥à¤•सानदायक
कई बार पेरेंटà¥à¤¸ को पता नहीं होता है और वे शिशà¥à¤“ं को जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ दूध पिला देते हैं, जिससे बचà¥à¤šà¥‡ को पेट संबंधी कई समसà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚ हो जाती हैं। जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ दूध के कारण कई बार शिशà¥à¤“ं को कबà¥à¤œ, दसà¥à¤¤ या पेट फूलना जैसी समसà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚ हो सकती हैं। जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ दूध पीने से कई बार बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के पेट में गंà¤à¥€à¤° दरà¥à¤¦ हो जाता है, जिससे वे लगातार रोने लगते हैं।
अगर बचà¥à¤šà¤¾ लगà¤à¤— 2 साल का है, तो à¤à¥€ उसके लिठदूध की उचित मातà¥à¤°à¤¾ जरूरी है। इस उमà¥à¤° के बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की पाचन कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ à¤à¥€ इतने अचà¥à¤›à¥‡ से काम नहीं कर पाती है और साथ ही वे बाहर की चीजें खाना शà¥à¤°à¥‚ कर देते हैं। à¤à¤¸à¥€ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में दूध की सही मातà¥à¤°à¤¾ को निशà¥à¤šà¤¿à¤¤ करना जरूरी है। दूध में फैट जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ होता है और जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ दूध को पचाने में समय लगता है। कई बार बचà¥à¤šà¤¾ दूध पीने के बाद कà¥à¤› और नहीं खा पाता है और उसे à¤à¥‚ख लगना कम हो जाती है। पोषण में असंतà¥à¤²à¤¨ होने से à¤à¥€ उसे कई सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ समसà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚ हो सकती हैं।
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